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Software Development Tools / Tool | Microprogram Control Organisation in Hindi

software development tools, Aids/ Tool ( सॉफ्टवेर डेवलेपमेंट टूल)

यह वह टूल होते हैं, जो प्रोग्राम या सॉफ्टवेर को बनाने में प्रयुक्त होते हैं, इनकी सहायता से आसानी से प्रोग्राम को कण्ट्रोल किया जा सकता हैं,  यह कुल software development tools पाच प्रकार के होते है.
Software Aids Tools in hindi

  1. Assembler 
  2. Linker
  3. Loader 
  4. Compiler 
  5. Libraries 
  6. Pre complied IP
  7. Simulator 
  8. IDE 

1. Assembler : असेंबलर वह  प्रोग्राम है जो ऑब्जेक्ट फाइल और मशीन कोड अथवा मशीनी भाषा को असेंबल लैंग्वेज में बदल देता है, दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि असेंबलर एक कंप्यूटर प्रोग्राम है, जो मशीन लैंग्वेज अथवा मशीन कोड को निर्देशित कर कंप्यूटर द्वारा क्रियान्वित किया जाता है।

असेंबलर एक कंप्यूटर लैंग्वेज में लिखा गया प्रोग्राम है, कभी-कभी असेम्बलर  को कंपाइलर के रूप में भी जाना जाता है हमें इंटरप्रेटर सर्विस प्रदान करता है, अगर असेंबलर जो एक कंप्यूटर पर चलता है और उसी कंप्यूटर पर रन करता है, और उसी कंप्यूटर के लिए कार्य करता है, एक मशीन कोड प्रदान करता है इसे रेजिडेंट असेंबलर कहते हैं।

यदि असेंबल कंप्यूटर पर रन होता है और किसी अन्य कंप्यूटर को भी मशीन कोड प्रदान करता है तो उसे क्रॉस असेंबलर कहते हैं |


2. Compiler : कंपाइलर कंप्यूटर का वह सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम का सेट है जो कि सोर्स कोड अथवा हाई लेवल लैंग्वेज जैसे JAVA लैंग्वेज को Source Code अथवा ऑब्जेक्ट कोड या मशीन कोड में बदल देता है, दूसरे शब्दों में कंपाइलर वह  प्रोग्राम है जो सोर्स कोड को ऑब्जेक्ट कोड अथवा प्रोग्राम Code में बदल देता है 

कंपाइलर, इंटरप्रेटर से भिन्न होता है क्योंकि इंटरप्रेटर , सोर्स कोड  को  एक ही बार में Analysis और execute कर सकता है जबकि Compiler Source Code को एक-एक लाइन  करके Analysis कर सकता है  compiler द्वारा Produce किए गए कार्य इंटरप्रेटर की अपेक्षा तेज गति से रन  होते हैं | 

3. Loader : Loader वह Programme है जो Programme के मशीन कोड  को सिस्टम मेमोरी में लोड करता है. 

Loader Operating System का एक हिस्सा है जो कि प्रोग्रामिंग लोडिंग के लिए उत्तरदाई होता है| Loader Program को मेमोरी में स्थापित करता है और एजुकेशन के लिए रिपेयर करता है जब लोडर प्रोग्राम को मेमोरी में लोड करता है तो Virtual address को Physical address में परिवर्तित कर देता है| 

4. Linker : जब हम कोई बड़ा प्रोग्राम लिखते हैं, तो यह हो सकता है कि पूरा Programme कई  छोटे-छोटे Modul में बटे होते हे ये modules अलग-अलग Compile भी हो सकते हैं इसलिए प्रोग्राम को रन करने से पहले इन सभी मॉडल को एक साथ जोड़ना या अटैच करना Linked करना होता हे उसे Linker  कहते हैं |  


5. Simulator : सिमुलेटर ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम जो वास्तविक दुनिया के किसी अत्यधिक जटिल कार्य को करने के विभिन्न पहलुओं को आभासी रूप से दर्शात है|  तथा यूजर को Capable  बनाता है , कि वह अवश्य रुप से उन्हें देख सके , समझ सके वह उनके अनुरूप निर्णय ले सके |  

यह Software , Real World को Real Stuatio को Virtually दिखाता है | तथा उनके आधार पर निर्णय लेने या एक्शन लेने तथा उनके परिणाम को दर्शाता है वो भी बिना किसी Real World के खतरे से आमना-सामना किया। उदाहरण :- 3D - Game , Flying Aircraft 


6. Libraries : एक लाइब्रेरी भी implementations of behavior का संग्रह होता है जिसे किसी भी भाषा के रूप में लिखा गया है |

उदाहरण के लिए एक User एक उच्च स्तरीय प्रोग्राम लिखना चाहता है वह उस सिस्टम कॉल को फिर से फिर से लागू करने की बजाय सिस्टम कॉल करने के लिए एक लाइब्रेरी का उपयोग कर सकते  है अर्थात  एक लाइब्रेरी,कंप्यूटर प्रोग्राम द्वारा उपयोग  किए जाने वाले नॉन वैल्यू सिटी संसाधनों का एक संग्रह होता है जो सॉफ्टवेयर डेवलप करने के लिए उपयोगी होते हैं | 

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7. IDE ( Integrated Development Environment ) :-
यह एक प्रकार का सॉफ्टवेयर Suite या टूल होता है जिसमें किसी खास लैंग्वेज पर कोड लिखने उसे टेस्ट करने के सारे मुख्य  टूल उपलब्ध होते हैं - जैसे Code editor, Compiler , Intcrprefcr तथा debugger

यह सभी एक Single graphical interface के द्वारा access किये जाते है | 

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